Shanghai Cooperation Organisation SCO

2025 में शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization, SCO) से जुड़ी हाल की घटनाएँ, प्राथमिकताएँ और उपलब्धियाँ


SCO क्या है — संक्षिप्त परिचय

शंघाई सहयोग संगठन 2001 में स्थापित एक क्षेत्रीय राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है। इसके सदस्य चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, कज़ाख़स्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस हैं। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सामरिक सहयोग, आतंकवाद, अलगाववाद और अति-वाद के खिलाफ मिलकर काम करना, आर्थिक विकास, पारगमन एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाना है।


2025 की महत्वपूर्ण घटनाएँ और प्रगति

  1. चीनी अध्यक्ष-पद और विषयवस्तु
    • 2024-25 की अवधि के लिए SCO की अध्यक्षता चीन ने स्वीकार की है।
    • अध्यक्ष-पद की थीम: “Upholding the Shanghai Spirit: SCO on the move” यानी शंघाई भावना का पालन करते हुए SCO को गतिशीलता के पथ पर अग्रसर करना।
    • 2025 को SCO “सतत विकास वर्ष” (Year of Sustainable Development) घोषित किया गया ताकि सदस्य देश विकास की नई दिशाएँ खोजें।
  2. Tianjin SCO शिखर सम्मेलन (Summit)
    • 25वाँ SCO Heads of State शिखर सम्मेलन 31 अगस्त-1 सितंबर 2025 को चीन के टियानजिन में हुआ।
    • यह अब तक का सबसे बड़ा SCO शिखर सम्मेलन माना जा रहा है।
    • इस सम्मेलन में “SCO Plus” सत्र भी हुआ, जिसमें सदस्य देशों के साथ-साथ साझेदार देशों और पर्यवेक्षका देशों के प्रतिनिधि एवं अन्तरराष्ट्रीय संगठनों ने भाग लिया।
  3. पुस्त बैंक एवं आर्थिक ढाँचे
    • रूस की अध्यक्षता (व्लादिमीर पुतिन के प्रस्ताव) में सदस्य देशों द्वारा संयुक्त बॉन्ड जारी करने, भुगतान-निपटान तंत्र, निवेश परियोजनाओं के लिए एक बैंक स्थापित करने की बातें हुईं ताकि आर्थिक सहयोग को मजबूत किया जाए और बाहरी वित्तीय झटकों से लड़ने की क्षमता बढ़े।
    • स्थानीय मुद्रा (local currency) में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने की पहल की गई।
  4. सुरक्षा एवं आतंक-वाद से मुकाबला
    • आतंकवाद, अलगाववाद और अति-वाद (“three evils”) के खिलाफ सदस्य देशों की प्रतिबद्धता दोबारा पुष्टि हुई।
    • सीमा क्षेत्रों में सैन्य पारस्परिक विश्वास बढ़ाने, सीमा विवादों से बचने, और आंतरिक स्थिरता बनाए रखने की योजनाएँ सामने आईं।
  5. सतत विकास, गरीबी उन्मूलन एवं परिवहन एवं बुनियादी ढाँचे
    • poverty reduction और sustainable development पर विशेष फोरम आयोजित हुआ Xi’an, Shaanxi प्रांत में।
    • सदस्य देशों ने परिवहन अवसंरचना (infrastructure) को सुधारने, एशिया-यूरोप को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय मार्गों और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट (rail/road/sea/air संयोजन) की दक्षता बढ़ाने के लिए पहल की।
  6. बेलारूस की सदस्यता
    • बेलारूस को SCO की पूर्ण सदस्यता मिल गई है, जिससे सदस्य देशों की संख्या दस हुई है।
  7. नैतिक-राजनयिक बातें और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
    • शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक नए वैश्विक क्रम (new global order) और बहुध्रुवीयता (multipolar world) की वकालत की। पश्चिमी दबाव, दिवालियापन, आर्थिक असमानता, ब्लॉक राजनीति आदि पर चिंता व्यक्त की गई।
    • संयुक्त राष्ट्र के नेताओं ने भी इस ओर ध्यान देते हुए कहा कि SCO वैश्विक बहुपक्षवाद और सतत विकास को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  8. भारत की भूमिका और चिंताएँ
    • भारत ने SCO के कुछ घोषणापत्रों / बयानों पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया जब ऐसे बयानों में भारत की चिंताओं को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया हो, विशेषकर आतंकवाद से सम्बंधित मुद्दों पर। उदाहरण के लिए, रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक संयुक्त बयान नहीं स्वीकारा क्योंकि वहां पाकिस्तान और अन्य मुद्दों के संदर्भ में भारतीय दृष्टिकोण शामिल नहीं था।
    • भारत की पर्यावरण, connectivity, संस्कृति आदान-प्रदान आदि क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी बढ़ी है और भारत ने “One Earth, One Family, One Future” की दृष्टि से सहमति प्राप्त की।

चुनौतियाँ और संभावित विवाद

  • सदस्य देशों के बीच सुरक्षा मुद्दों (खासकर आतंकवाद), सीमाना विवाद, और राजनीतिक मतभेद अभी भी मौजूद हैं, जो क्रियान्वयन को प्रभावित कर सकते हैं।
  • पश्चिमी दबाव, आर्थिक प्रतिबंध, मुद्रा अस्थिरता आदि बाहरी कारक SCO के आर्थिक और वित्तीय लक्ष्यों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
  • सदस्य देशों के विकास स्तर में अंतर और संसाधनों की कमी कुछ परियोजनाओं को लंबित कर सकती हैं।

निष्कर्ष

2025 में SCO ने अपनी भूमिका और महत्व को बढ़ाने के लिए कई महत्वाकांक्षी कदम उठाए हैं — आर्थिक गठजोड़, सुरक्षा साझेदारी, विकास पहल, अउर विस्तार (expansion) ये सभी संकेत हैं कि संगठन अब सिर्फ क्षेत्रीय संस्था नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बन रहा है। भारत सहित सदस्य देशों के बीच संतुलन बनाए रखना और आतंकवाद, सीमाना विवाद जैसे संवेदनशील मामलों को सुचारू रूप से संभालना SCO के लिए आगामी समय की कुंजी होगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shopping Basket
Scroll to Top