“RBI Digital Currency (e₹): India’s Digital Rupee Revolution


💠 आरबीआई की डिजिटल करेंसी (Digital Rupee – e₹)

🔹 परिचय

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने नवंबर 2022 में अपनी पहली डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency – CBDC) का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था, जिसे आमतौर पर “ई-रुपया” (e₹) कहा जाता है।
यह भारत की वैधानिक मुद्रा (Legal Tender) का डिजिटल स्वरूप है — यानी यह रुपये का इलेक्ट्रॉनिक रूप है, जिसे RBI जारी करता है और जो नकदी की तरह ही उपयोगी है।


🔹 डिजिटल करेंसी क्या है?

डिजिटल करेंसी (CBDC) का मतलब है —
केंद्रीय बैंक (RBI) द्वारा जारी की गई ऐसी डिजिटल मुद्रा जो भौतिक नोट या सिक्के की तरह वैध भुगतान माध्यम हो।

👉 यह क्रिप्टोकरेंसी नहीं है क्योंकि इसे सरकार और केंद्रीय बैंक नियंत्रित करते हैं, न कि किसी निजी या विकेंद्रीकृत नेटवर्क द्वारा।


🔹 ई-रुपया (e₹) के दो प्रमुख प्रकार

  1. Retail CBDC (e₹-R):
    • आम जनता, उपभोक्ताओं और खुदरा व्यापारियों के लिए।
    • इसे मोबाइल वॉलेट्स या ऐप के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
    • उदाहरण: डिजिटल भुगतान जैसे UPI, लेकिन यह सीधे RBI द्वारा जारी मुद्रा है।
  2. Wholesale CBDC (e₹-W):
    • केवल बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच इंटरबैंक ट्रांजैक्शन के लिए।
    • इससे भुगतान निपटान (Settlement) प्रक्रिया तेज़ और सस्ती बनती है।

🔹 ई-रुपया कैसे काम करता है?

  • RBI प्रत्येक डिजिटल रुपया को टोकन रूप में जारी करता है।
  • यह टोकन व्यक्ति या संस्था के डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है।
  • ट्रांज़ैक्शन Peer-to-Peer (P2P) या Person-to-Merchant (P2M) दोनों हो सकते हैं।
  • लेनदेन ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से संभव है।
  • सभी ट्रांज़ैक्शन ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल लेजर पर दर्ज किए जाते हैं।

🔹 उद्देश्य

  1. कैश निर्भरता घटाना
  2. भुगतान प्रणाली की कार्यक्षमता बढ़ाना
  3. क्रिप्टोकरेंसी के अनियंत्रित उपयोग को रोकना
  4. वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देना
  5. सरकारी सब्सिडी और DBT (Direct Benefit Transfer) में पारदर्शिता लाना

🔹 डिजिटल करेंसी बनाम UPI

बिंदु UPI Digital Rupee (e₹) जारीकर्ता बैंक RBI मुद्रा प्रकार बैंक डिपॉजिट ट्रांसफर वास्तविक डिजिटल नकद इंटरनेट आवश्यक हाँ नहीं (Offline Mode संभव) नियंत्रण निजी बैंकों द्वारा पूरी तरह RBI द्वारा लेनदेन पहचान बैंक खाते से जुड़ा टोकन आधारित, गुमनाम भी हो सकता है


🔹 डिजिटल करेंसी के लाभ

  1. तेज़ और सुरक्षित भुगतान: Blockchain तकनीक से लेनदेन सुरक्षित।
  2. भ्रष्टाचार नियंत्रण: हर ट्रांज़ैक्शन का ट्रेस रिकॉर्ड संभव।
  3. लेनदेन लागत में कमी: मध्यस्थ संस्थानों की आवश्यकता कम।
  4. वैश्विक भुगतान सुविधा: सीमापार ट्रांज़ैक्शन (Cross-border Payments) सरल होंगे।
  5. वित्तीय समावेशन: बिना बैंक खाता वाले लोग भी डिजिटल मुद्रा उपयोग कर सकेंगे।

🔹 संभावित चुनौतियाँ

  1. साइबर सुरक्षा और हैकिंग का जोखिम।
  2. गोपनीयता (Privacy) से जुड़ी चिंताएँ।
  3. बैंकिंग प्रणाली पर प्रभाव — बैंक डिपॉजिट घटने का खतरा।
  4. नई तकनीक के प्रति जागरूकता और स्वीकृति की कमी।
  5. ऑफलाइन उपयोग की तकनीकी सीमाएँ।

🔹 वैश्विक संदर्भ

देश डिजिटल करेंसी नाम स्थिति चीन e-CNY (Digital Yuan) राष्ट्रीय स्तर पर लागू नाइजीरिया e-Naira लागू यूरोपीय संघ Digital Euro परीक्षण चरण में बहामास Sand Dollar पूर्ण रूप से लागू भारत e-Rupee पायलट चरण में (Retail + Wholesale)


🔹 भारत में e-Rupee पायलट की स्थिति (2025 तक)

  • अब तक 9 प्रमुख बैंक इस प्रोजेक्ट से जुड़े हैं (SBI, HDFC, ICICI आदि)।
  • 15 से अधिक शहरों में रिटेल CBDC ट्रायल चल रहा है।
  • RBI धीरे-धीरे इसे व्यापक उपयोग के लिए बढ़ा रहा है।

🔹 निष्कर्ष

डिजिटल रुपया (e₹) भारत की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) और डिजिटल इकोनॉमी का भविष्य तय करने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।
यह कदम न केवल लेनदेन प्रणाली को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि भारत को “कैशलेस समाज” (Less-Cash Economy) की दिशा में भी अग्रसर करेगा।


📘 परीक्षा के दृष्टिकोण से (Summary Table)

लॉन्च वर्ष = 2022 (पायलट प्रोजेक्ट)

लॉन्च संस्था = भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)

आधिकारिक नाम = Central Bank Digital Currency (CBDC)

डिजिटल रूप = e-₹ (Digital Rupee)

प्रकार = Retail (e₹-R), Wholesale (e₹-W)

तकनीक =  Blockchain एवं Tokenisation

उद्देश्य = डिजिटल लेनदेन, वित्तीय समावेशन, पारदर्शिता

मुख्य  लाभ =  कम लागत, सुरक्षित भुगतान, नकद पर निर्भरता घटाना

जोखिम = साइबर सुरक्षा, गोपनीयता, तकनीकी अवरोध

आधिकारिक नाम Central Bank Digital Currency (CBDC) डिजिटल रूप e-₹ (Digital Rupee) प्रकार Retail (e₹-R), Wholesale (e₹-W) तकनीक Blockchain एवं Tokenisation उद्देश्य डिजिटल लेनदेन, वित्तीय समावेशन, पारदर्शिता मुख्य लाभ कम लागत, सुरक्षित भुगतान, नकद पर निर्भरता घटाना जोखिम साइबर सुरक्षा, गोपनीयता, तकनीकी अवरोध


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