
🧠 2025 का भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Physics 2025)
🏅 विजेता (Winners):
John Clarke,
Michel H. Devoret,
और John M. Martinis
📅 घोषणा तिथि:
8 अक्टूबर 2025
🏛️ घोषणा संस्था:
Royal Swedish Academy of Sciences
(रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज, स्टॉकहोम, स्वीडन)
📚 पुरस्कार का कारण (For their Contribution):
“For their pioneering experiments showing quantum effects in macroscopic systems.”
हिन्दी में —
“बड़े (मैक्रोस्कोपिक) सिस्टमों में क्वांटम प्रभावों को प्रदर्शित करने वाले उनके अग्रणी प्रयोगों के लिए।”
⚛️ मुख्य खोज (Main Discovery):
इन वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया कि क्वांटम मैकेनिक्स (Quantum Mechanics) के नियम केवल सूक्ष्म परमाणु या इलेक्ट्रॉन जैसे कणों पर ही नहीं, बल्कि बड़े उपकरणों में भी देखे जा सकते हैं।
👉 उन्होंने यह दिखाया कि Quantum tunneling और energy quantization जैसे प्रभावों को भी प्रयोगशाला में बनाए गए यंत्रों पर प्रदर्शित किया जा सकता है।
🔬 क्या है Macroscopic Quantum Tunnelling?
- सामान्यतः क्वांटम टनलिंग (Quantum Tunneling) का अर्थ है —
कोई कण ऐसी ऊर्जा अवरोध (Energy Barrier) पार कर लेता है, जिसे पार करना सामान्यतः असंभव होता है। - यह प्रभाव सूक्ष्म स्तर (जैसे इलेक्ट्रॉन) पर जाना जाता था।
- इन वैज्ञानिकों ने दिखाया कि यही घटना बड़े स्तर (macroscopic scale) पर भी हो सकती है।
💡 इस खोज का महत्व (Significance of the Discovery):
- Quantum Computing में क्रांति:
- इस खोज ने यह साबित किया कि क्वांटम प्रभावों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर Quantum Computer Chips बनाए जा सकते हैं।
- इन प्रयोगों से Superconducting Qubits (क्वांटम बिट्स) की समझ और बेहतर हुई।
- Quantum Sensors का विकास:
- अति-संवेदनशील मापन यंत्र (जैसे SQUID – Superconducting Quantum Interference Devices) के विकास में मदद मिली।
- Quantum Technologies का नया युग:
- अब क्वांटम प्रभावों को प्रयोगात्मक रूप से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे नई तकनीकों — जैसे क्वांटम नेटवर्किंग, सुरक्षित संचार, और उच्च-सटीक घड़ियाँ — संभव हुई हैं।
👨🔬 तीनों वैज्ञानिकों का परिचय (About the Winners):
नाम; John Clarke
देश; यूनाइटेड किंगडम (UK) / अमेरिका SQUID योगदान; (Superconducting Quantum Interference Device) तकनीक के जनक माने जाते हैं।
नाम; Michel H. Devoret
देश; फ्रांस
योगदान; Superconducting Circuits में Quantum Control के अग्रणी वैज्ञानिक हैं।
नाम; John M. Martinis
देश; अमेरिका
योगदान; Google के Quantum Computing प्रोजेक्ट “Sycamore” के मुख्य वैज्ञानिक रहे।
🧩 Quantum Physics का मूल सिद्धांत (Basic Concept Reminder):
- क्वांटम भौतिकी यह कहती है कि ऊर्जा निरंतर नहीं होती, बल्कि यह छोटे-छोटे क्वांटम पैकेट्स (quanta) में मौजूद होती है।
- यह सिद्धांत आधुनिक भौतिकी, लेज़र, ट्रांजिस्टर, नैनो तकनीक, और अब क्वांटम कंप्यूटर की नींव है।
🌍 वैश्विक प्रभाव (Global Impact):
- यह खोज Quantum Internet, Quantum Security और Artificial Intelligence आधारित क्वांटम प्रोसेसिंग में नई दिशा दिखा रही है।
- अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे देशों में अब अरबों डॉलर के Quantum Research प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
🧾 प्रश्नोत्तर (Important MCQs for Exams):
Q1. 2025 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार किस क्षेत्र में दिया गया?
उत्तर: मैक्रोस्कोपिक सिस्टम में क्वांटम प्रभाव प्रदर्शित करने के लिए।
Q2. 2025 के भौतिकी नोबेल पुरस्कार विजेताओं की संख्या कितनी है?
उत्तर: तीन – John Clarke, Michel H. Devoret, और John M. Martinis।
Q3. Macroscopic Quantum Tunnelling क्या है?
उत्तर: बड़े पैमाने पर (macro level) कणों का ऊर्जा अवरोध पार कर जाना।
Q4. Quantum Computer में प्रयोग होने वाला मुख्य सिद्धांत क्या है?
उत्तर: सुपरकंडक्टिंग क्वांटम बिट्स (Superconducting Qubits)।
Q5. नोबेल पुरस्कार की घोषणा कौन-सी संस्था करती है?
उत्तर: Royal Swedish Academy of Sciences।
🪙 रोचक तथ्य (Interesting Facts):
- John M. Martinis को 2019 में Google के Quantum Supremacy प्रयोग के लिए भी जाना गया था।
- Michel Devoret और John Clarke ने मिलकर दुनिया के पहले Superconducting Quantum Circuit को सफलतापूर्वक मापा था।
- इस खोज को Quantum to Classical Transition को समझने का सबसे महत्वपूर्ण कदम कहा गया है।
📰 निष्कर्ष (Conclusion):
2025 का भौतिकी में नोबेल पुरस्कार यह दर्शाता है कि विज्ञान अब सूक्ष्म जगत (microscopic world) से निकलकर वास्तविक दुनिया (macroscopic world) में भी क्वांटम युग की ओर बढ़ चुका है।
यह खोज न केवल क्वांटम कंप्यूटरों के भविष्य को परिभाषित करती है, बल्कि मानव तकनीकी विकास की नई दिशा भी तय करती है।