🏞️ गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान – छत्तीसगढ़ की हरित धरोहर

गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान (Guru Ghasidas National Park) छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर कोरिया जिले में स्थित है।
यह उद्यान छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और वन्यजीव विविधता का प्रतीक है।
इस उद्यान का नाम संत गुरु घासीदास जी के नाम पर रखा गया है, जो सत्य, अहिंसा और समानता के उपदेशक थे।
यह उद्यान पहले संजय राष्ट्रीय उद्यान (Sanjay National Park) का हिस्सा था, लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभाजन (2000) के बाद इसे अलग कर दिया गया और छत्तीसगढ़ हिस्से को “गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान” नाम दिया गया।
📍 मुख्य तथ्य (Key Facts)
विषय जानकारी
📍 स्थान यह छत्तीसगढ़ के कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में स्थित है।
🗓️ स्थापना वर्ष 1983 में संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व के रूप में हुई थी, जो पहले मध्य प्रदेश का हिस्सा था।
📏 क्षेत्रफल लगभग 1,440 वर्ग किलोमीटर
🌿 प्रकार राष्ट्रीय उद्यान एवं प्रस्तावित टाइगर रिजर्व
🐅 प्रमुख वन्यजीव बाघ, तेंदुआ, भालू, चीतल, सांभर, नीलगाय 🏞️ भौगोलिक विशेषता सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला का हिस्सा
🌿 इतिहास और महत्व
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास संजय-दुबरी वन क्षेत्र से जुड़ा है।
मध्यप्रदेश के विभाजन से पहले यह संजय राष्ट्रीय उद्यान का दक्षिणी हिस्सा था।
विभाजन के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने इस क्षेत्र को गुरु घासीदास जी की स्मृति में नया नाम दिया।
यह क्षेत्र सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है, जहाँ अनेक नदियाँ और झरने बहते हैं।
यह उद्यान छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच वन्यजीवों के प्रवास (Wildlife Corridor) के रूप में कार्य करता है, जिससे बाघ और अन्य जानवरों की आवाजाही संभव होती है।
🐅 जैव विविधता (Biodiversity)
यह उद्यान जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है।
यहाँ के घने साल, सागौन, बांस, महुआ, बेल, और तेंदू के जंगल अनेक पशु-पक्षियों का घर हैं।
🐾 प्रमुख वन्यजीव:
- 🐅 बाघ (Tiger)
- 🐆 तेंदुआ (Leopard)
- 🐻 भालू (Sloth Bear)
- 🦌 चितल, सांभर, नीलगाय, बारहसिंगा
- 🐃 जंगली भैंसा (Gaur)
- 🐍 अजगर, नाग, गोह
- 🦜 मोर, हॉर्नबिल, बुलबुल, उल्लू, तोता
🌊 भौगोलिक विशेषताएँ
- उद्यान का भूभाग पहाड़ी और समतल मिश्रित है।
- यहाँ से कई छोटी नदियाँ जैसे गोपाल, सोन, और बान्धरा नदी बहती हैं।
- यह क्षेत्र सतपुड़ा की दक्षिणी श्रृंखला में आता है, जहाँ की ऊँचाई 300–1100 मीटर तक है।
🌱 वर्तमान स्थिति (Current Status 2025)
- वर्ष 2021 में, भारत सरकार ने इसे “गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य” को मिलाकर एक नया टाइगर रिज़र्व (Guru Ghasidas–Tamor Pingla Tiger Reserve) घोषित किया।
- इससे यह क्षेत्र अब छत्तीसगढ़ का चौथा टाइगर रिज़र्व बन गया है।
- 2025 तक, यहाँ कैमरा ट्रैप में कई बाघों और तेंदुओं की उपस्थिति दर्ज की गई है।
- वन विभाग और NTCA (National Tiger Conservation Authority) इस क्षेत्र में नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
- स्थानीय आदिवासी समुदायों को “Joint Forest Management” के तहत शामिल किया गया है, ताकि संरक्षण और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिले।
🚙 पर्यटन की स्थिति
वर्तमान में गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को सीमित रूप से विकसित किया जा रहा है।
यहाँ पर्यटक जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, प्राकृतिक झरनों और वन्यजीव दर्शन का आनंद ले सकते हैं।
🧭 पहुंचने का तरीका (How to Reach):
- निकटतम रेलवे स्टेशन: बैकुंठपुर (लगभग 60 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा: रायपुर (लगभग 350 किमी)
- सड़क मार्ग: कोरिया जिला मुख्यालय से निजी वाहन या टैक्सी द्वारा पहुँचा जा सकता है।
🧭 निष्कर्ष
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान का अद्भुत संगम है।
यह न केवल वन्यजीवों का सुरक्षित घर है, बल्कि गुरु घासीदास जी के सिद्धांतों की प्रतीक भूमि भी है — जहाँ समानता, शांति और प्रकृति प्रेम का संदेश आज भी गूँजता है।
सरकार और स्थानीय समुदायों के प्रयासों से यह क्षेत्र अब बाघ संरक्षण और इको-टूरिज्म दोनों में प्रगति कर रहा है।
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