🇮🇳 भारत में कंप्यूटर का विकास (Development of Computers in India)

🔹 प्रस्तावना
कंप्यूटर आज मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। शिक्षा, उद्योग, बैंकिंग, चिकित्सा, शासन और अनुसंधान — हर क्षेत्र में इसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में कंप्यूटर का विकास स्वतंत्रता के बाद तेजी से हुआ, जिसने देश को डिजिटल युग की ओर अग्रसर किया।
🔹 प्रारंभिक दौर (1950–1970)
भारत में कंप्यूटर का इतिहास 1950 के दशक से शुरू हुआ।
1955 में इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट (ISI), कोलकाता में पहला एनालॉग कंप्यूटर स्थापित किया गया।
1958 में TIFR (Tata Institute of Fundamental Research) ने भारत का पहला डिजिटल कंप्यूटर TIFRAC (TIFR Automatic Calculator) बनाया।
यह पूरी तरह से भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया था और भारत की तकनीकी स्वावलंबन का प्रतीक बना।
🔹 दूसरा चरण: सरकारी प्रोत्साहन और शिक्षा (1970–1990)
इस अवधि में भारत ने कंप्यूटर शिक्षा और सरकारी नीतियों पर ध्यान देना शुरू किया।
1970 के दशक में सरकारी कार्यालयों में कंप्यूटर का सीमित उपयोग शुरू हुआ।
1980 के दशक में सरकार ने कंप्यूटर नीति लागू की और Department of Electronics (DoE) की स्थापना की।
1984 में राजीव गांधी सरकार ने कंप्यूटरीकरण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया। इस दौर में NICNET (National Informatics Centre Network) जैसी परियोजनाएं शुरू हुईं, जिसने सरकारी विभागों को डिजिटल रूप से जोड़ने में मदद की।

🔹 तीसरा चरण: सॉफ्टवेयर और IT क्रांति (1990–2010)
1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत में IT और सॉफ्टवेयर उद्योग तेजी से उभरा।
Infosys, Wipro, TCS, HCL जैसी कंपनियों ने विश्व स्तर पर पहचान बनाई।
Bangalore को “India’s Silicon Valley” कहा जाने लगा।
भारत में Y2K समस्या के समाधान में भारतीय इंजीनियरों की भूमिका ने विश्व में भारत की छवि मजबूत की।
🔹 चौथा चरण: डिजिटल भारत और आधुनिक युग (2010–वर्तमान)
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Digital India Mission की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य था भारत को “डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था” बनाना।
आज भारत में AI (Artificial Intelligence), Cloud Computing, Cyber Security, IoT (Internet of Things) जैसे क्षेत्रों में तेजी से प्रगति हो रही है।
Startup India और Make in India अभियानों ने भारतीय तकनीकी कंपनियों को नई दिशा दी।
ISRO, DRDO, CDAC और NIC जैसे संस्थान आज विश्वस्तरीय कंप्यूटर तकनीक विकसित कर रहे हैं।
🔹 निष्कर्ष
भारत ने कंप्यूटर के क्षेत्र में शून्य से शुरुआत की और आज विश्व की अग्रणी डिजिटल शक्तियों में शामिल है।
कंप्यूटर न केवल भारत की आर्थिक प्रगति का आधार बना है, बल्कि यह “Digital India” के स्वप्न को साकार करने का माध्यम भी है।
भविष्य में भारत Quantum Computing, AI, और Robotics के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है।
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