Astrosat – India’s first space observatory satellite

📌 Astrosat (एस्ट्रोसेट) – भारत का पहला स्पेस ऑब्जर्वेटरी सैटेलाइट

Astrosat क्या है?

Astrosat (एस्ट्रोसेट) भारत का पहला मल्टी-वेवलेंथ स्पेस ऑब्जर्वेटरी सैटेलाइट है। इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 28 सितंबर 2015 को लॉन्च किया।

Astrosat का उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद तारों, ग्रहों, आकाशगंगाओं और ब्लैक होल्स जैसी रहस्यमयी घटनाओं का अध्ययन करना है। यह अमेरिका के Hubble Telescope की तरह ही काम करता है, लेकिन इसका अपना अलग महत्व है।


Astrosat का लॉन्च

  • लॉन्च तिथि: 28 सितंबर 2015
  • लॉन्च स्थल: सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)
  • लॉन्च वाहन: PSLV-C30 (Polar Satellite Launch Vehicle)
  • वजन: लगभग 1513 किलोग्राम
  • कक्षा (Orbit): लगभग 650 किमी ऊँचाई पर पृथ्वी की कक्षा

Astrosat का उद्देश्य

  1. ब्रह्मांड में तारों और आकाशगंगाओं का अध्ययन करना।
  2. ब्लैक होल्स और न्यूट्रॉन सितारों से निकलने वाली किरणों का पता लगाना।
  3. अल्ट्रावॉयलेट, एक्स-रे और ऑप्टिकल स्पेक्ट्रम में डेटा इकट्ठा करना।
  4. तारों के बनने और खत्म होने की प्रक्रिया समझना।
  5. भारत के वैज्ञानिकों को स्पेस ऑब्जर्वेशन रिसर्च में आत्मनिर्भर बनाना।

Astrosat के प्रमुख उपकरण (Payloads)

Astrosat में कई अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जैसे:

  • Ultraviolet Imaging Telescope (UVIT) → तारों और आकाशगंगाओं का UV इमेजिंग
  • Soft X-ray Telescope (SXT) → ब्लैक होल और एक्स-रे स्रोतों का अध्ययन
  • Large Area X-ray Proportional Counter (LAXPC) → उच्च ऊर्जा एक्स-रे का अवलोकन
  • Cadmium Zinc Telluride Imager (CZTI) → गामा-रे स्रोतों का पता लगाना
  • Scanning Sky Monitor (SSM) → बदलते खगोलीय स्रोतों का ट्रैक करना

Astrosat का महत्व

  • यह भारत का पहला स्पेस ऑब्जर्वेटरी सैटेलाइट है।
  • इससे भारत ने खगोल विज्ञान में वैश्विक स्तर पर योगदान दिया।
  • विदेशी वैज्ञानिक भी इसके डेटा का उपयोग कर रहे हैं।
  • यह Hubble Telescope के बाद दुनिया का एक महत्वपूर्ण रिसर्च प्लेटफॉर्म है।
  • Astrosat से मिले डेटा ने कई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पेपर प्रकाशित करवाए।

निष्कर्ष

Astrosat (एस्ट्रोसेट) भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक क्षमता का प्रतीक है। इसने साबित किया कि भारत अब सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड की गहराइयों को समझने में भी सक्षम है। आने वाले समय में भारत और भी बड़े अंतरिक्ष अनुसंधान प्रोजेक्ट लाने वाला है।

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