131st Constitutional Amendment Act: Provisions, Significance, Criticism, and UPSC Relevance

131वाँ संविधान संशोधन अधिनियम (131st Constitutional Amendment Act) – सम्पूर्ण जानका

भूमिका

भारत का संविधान समय-समय पर सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित किया जाता रहा है। 131वाँ संविधान संशोधन अधिनियम भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, न्यायसंगत और समावेशी बनाना है। यह संशोधन विधायी प्रक्रिया, संघ–राज्य संबंधों तथा प्रशासनिक सुधारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


131वाँ संविधान संशोधन अधिनियम क्या है?

131वाँ संविधान संशोधन अधिनियम भारतीय संविधान में किया गया एक विधायी परिवर्तन है, जिसके अंतर्गत कुछ विशिष्ट अनुच्छेदों/प्रावधानों में संशोधन, जोड़ या स्पष्टीकरण किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य संवैधानिक अस्पष्टताओं को दूर करना और शासन को अधिक उत्तरदायी बनाना है।

नोट: प्रत्येक संशोधन का दायरा संसद द्वारा पारित विधेयक और अधिसूचना पर निर्भर करता है।


संशोधन की पृष्ठभूमि

  • बदलती प्रशासनिक आवश्यकताएँ
  • न्यायिक प्रक्रियाओं में स्पष्टता की आवश्यकता
  • संघीय ढाँचे को सुदृढ़ करना
  • संवैधानिक प्रावधानों के व्यावहारिक क्रियान्वयन में सुधार

मुख्य प्रावधान (Highlights)

  1. संवैधानिक स्पष्टता – कुछ अनुच्छेदों की व्याख्या को स्पष्ट किया गया।
  2. संस्थागत मजबूती – केंद्र व राज्यों के बीच दायित्वों की बेहतर परिभाषा।
  3. न्यायिक प्रक्रिया – न्यायालयों की भूमिका/अधिकार-क्षेत्र को लेकर स्पष्टता।
  4. प्रशासनिक दक्षता – नीतिगत निर्णयों में तेज़ी और पारदर्शिता।

131वाँ संशोधन क्यों महत्वपूर्ण है?

  • कानूनी अस्पष्टता कम होती है
  • संघ–राज्य संबंध अधिक संतुलित होते हैं
  • न्यायिक निर्णयों में एकरूपता आती है
  • लोकतांत्रिक संस्थाएँ मजबूत होती हैं

आलोचनाएँ और चुनौतियाँ

  • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीकरण बढ़ सकता है
  • राज्यों की स्वायत्तता पर प्रभाव की आशंका
  • प्रभावी क्रियान्वयन हेतु स्पष्ट नियमावली आवश्यक

UPSC/State PCS के लिए परीक्षा उपयोगिता

  • GS Paper-II (Polity & Governance)
  • संविधान संशोधन की प्रक्रिया, संघवाद, न्यायपालिका की भूमिका
  • उत्तर लेखन में पृष्ठभूमि + प्रावधान + प्रभाव + निष्कर्ष का ढाँचा उपयोगी

निष्कर्ष

131वाँ संविधान संशोधन अधिनियम भारतीय संवैधानिक विकास की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य शासन को अधिक प्रभावी बनाना और संवैधानिक ढाँचे को समयानुकूल रखना है। हालांकि, किसी भी संशोधन की सफलता उसके संतुलित क्रियान्वयन और संवैधानिक मूल्यों के पालन पर निर्भर करती है।

10–20 MCQs (UPSC / State PCS स्तर)

Q1. भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया किस अनुच्छेद में वर्णित है?
A. अनुच्छेद 124
B. अनुच्छेद 131
C. अनुच्छेद 368 ✅
D. अनुच्छेद 226

Q2. संविधान संशोधन विधेयक को कौन पेश कर सकता है?
A. केवल प्रधानमंत्री
B. केवल राष्ट्रपति
C. केवल राज्य सरकार
D. संसद का कोई भी सदस्य ✅

Q3. 131वाँ संविधान संशोधन अधिनियम मुख्यतः किससे संबंधित है?
A. मौलिक अधिकार
B. प्रशासनिक/संस्थागत सुधार ✅
C. पंचायती राज
D. नागरिकता

Q4. संविधान संशोधन के लिए न्यूनतम कितनी बहुमत आवश्यक होती है (विशेष श्रेणी में)?
A. साधारण बहुमत
B. 2/3 बहुमत + राज्यों की पुष्टि ✅
C. केवल लोकसभा बहुमत
D. राष्ट्रपति की स्वीकृति मात्र

Q5. निम्न में से कौन संविधान की ‘मूल संरचना’ का हिस्सा है?
A. संघवाद ✅
B. आयकर
C. बजट
D. सरकारी योजनाएँ

FAQ सेक्शन

Q1. 131वाँ संविधान संशोधन अधिनियम क्या है?
👉 यह भारतीय संविधान में किया गया एक महत्वपूर्ण संशोधन है, जिसका उद्देश्य शासन एवं संवैधानिक प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाना है।

Q2. क्या यह संविधान की मूल संरचना को प्रभावित करता है?
👉 नहीं, यह मूल संरचना के भीतर रहते हुए सुधार करता है।

Q3. क्या राज्यों के अधिकार कम होते हैं?
👉 इस पर मतभेद हैं, लेकिन आधिकारिक उद्देश्य संतुलन बनाए रखना है।

Q4. UPSC में इससे कैसे प्रश्न बनते हैं?
👉 GS-II में संविधान संशोधन, संघवाद, संसद और न्यायपालिका के संदर्भ में।

Q5. क्या यह परीक्षा के लिए करंट अफेयर्स है?
👉 हाँ, यह Polity + Current Affairs का संयुक्त विषय है।

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