
🌿 केरल बना भारत का पहला “अतिदारिद्र्य मुक्त” राज्य
भारत के इतिहास में पहली बार कोई राज्य “एक्सट्रीम पावर्टी-मुक्त (Extreme Poverty Free)” बन गया है — और यह गौरवशाली उपलब्धि हासिल की है केरल सरकार ने। यह घोषणा मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने की, जो राज्य की सामाजिक न्याय और समानता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
🌍 केरल की ऐतिहासिक पहल
केरल सरकार ने 2021 में “अतिदारिद्र्य उन्मूलन परियोजना (Extreme Poverty Eradication Project)” की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य था कि राज्य के किसी भी नागरिक को अब जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित न रहना पड़े।
तीन वर्षों की निरंतर मेहनत, सर्वेक्षण, और स्थानीय निकायों की सहभागिता से केरल ने 2025 में यह मील का पत्थर छू लिया है।
🏠 क्या है ‘अतिदारिद्र्य’?
‘अतिदारिद्र्य’ का अर्थ केवल धन की कमी नहीं है —
बल्कि वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति या परिवार के पास भोजन, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने के लिए साधन नहीं होते।
केरल ने इस परिभाषा को बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index – MPI) के आधार पर मापा, जिससे गरीबी को कई पहलुओं से समझा जा सके।
📊 कैसे बना केरल ‘अतिदारिद्र्य मुक्त’?
- सटीक सर्वेक्षण और पहचान:
राज्यभर में 64,000 से अधिक परिवारों की पहचान “अतिदारिद्र” के रूप में की गई। पंचायतों और वार्ड-स्तर पर घर-घर सर्वे हुए। - माइक्रो-प्लानिंग (Micro Planning):
प्रत्येक गरीब परिवार के लिए अलग-अलग एक्शन प्लान तैयार किया गया — जिसमें आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि, रोजगार और वित्तीय सहायता जैसे उपाय शामिल थे। - स्थानीय स्वशासन की भूमिका:
ग्राम पंचायतों और नगरपालिका इकाइयों ने इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभाई।
“लोगों के लिए लोगों का विकास मॉडल” यही इस अभियान का आधार बना। - सशक्त महिला सहभागिता:
महिला स्वयं सहायता समूहों (कुदुंबश्री मिशन) ने गरीब परिवारों तक पहुंच बनाकर आजीविका के साधन उपलब्ध कराए। - सरकारी योजनाओं का एकीकरण:
राज्य ने प्रधानमंत्री आवास योजना, जीवन मिशन, स्वास्थ्य मिशन, और स्थानीय योजनाओं को जोड़कर समग्र गरीबी-निवारण तंत्र बनाया।
💡 क्यों खास है यह उपलब्धि
- केरल ने यह सिद्ध कर दिया कि गरीबी केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय विकास का मुद्दा है।
- यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण है कि किस प्रकार नीति-निर्माण, तकनीक और स्थानीय भागीदारी मिलकर “सामाजिक क्रांति” ला सकते हैं।
- यूनिसेफ और नीति आयोग दोनों ने केरल के इस कदम की सराहना की है।
⚙️ आगे की चुनौतियाँ
- गरीबी से बाहर आए परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना एक प्रमुख चुनौती होगी।
- जलवायु परिवर्तन और बेरोजगारी जैसी नई सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में यह सुनिश्चित करना कि कोई परिवार फिर से गरीबी में न फँसे।
- सतत निगरानी और डेटा-आधारित नीति बनाना ज़रूरी होगा।
🌾 निष्कर्ष
केरल का “अतिदारिद्र्य मुक्त राज्य” बनना भारत के विकास मॉडल में एक प्रेरणादायक अध्याय है।
यह सिर्फ एक सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों की जीत है जिन्होंने संघर्ष से सम्मानजनक जीवन तक का सफर तय किया।
यदि यह मॉडल देशभर में लागू किया जाए तो भारत “गरीबी-मुक्त भारत” बनने की दिशा में वास्तविक कदम बढ़ा सकता है।
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