
🌊 एल नीनो और ला नीना: कारण, प्रभाव और अंतर
🔹 परिचय
एल नीनो (El Niño) और ला नीना (La Niña) दोनों ही प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में होने वाली जलवायु घटनाएँ हैं, जो पूरी दुनिया के मौसम पैटर्न को प्रभावित करती हैं। ये घटनाएँ ENSO (El Niño–Southern Oscillation) चक्र का हिस्सा हैं, जिसमें महासागर और वायुमंडल के बीच तापमान का संतुलन बदलता रहता है।
🌡️ एल नीनो (El Niño) क्या है?
- “El Niño” शब्द का अर्थ स्पेनिश भाषा में “बालक” या “ईसा मसीह का बालक” होता है।
- यह स्थिति तब बनती है जब प्रशांत महासागर का सतही तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है।
- इसके कारण समुद्री धाराएँ और वायुमंडलीय प्रवाह बदल जाते हैं, जिससे विश्व के विभिन्न हिस्सों में सूखा, बाढ़, और असामान्य मौसम की स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।
🔸 मुख्य प्रभाव
- भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में मानसून कमजोर पड़ जाता है।
- दक्षिण अमेरिका के तटीय इलाकों में अधिक वर्षा और बाढ़ आती है।
- उत्तरी अमेरिका में गर्म सर्दियाँ और दक्षिणी अमेरिका में ठंडी सर्दियाँ हो सकती हैं।
🔸 भारत पर प्रभाव
- एल नीनो के कारण भारत में अक्सर कम वर्षा (drought-like conditions) होती है।
- फसलों की पैदावार घटती है, जिससे कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
❄️ ला नीना (La Niña) क्या है?
- “La Niña” शब्द का अर्थ है “लड़की” या “ईसा मसीह की बालिका”।
- यह एल नीनो के विपरीत स्थिति होती है, जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से कम हो जाता है।
- इस दौरान हवाएँ तेज़ होती हैं और समुद्र की ठंडी धाराएँ अधिक सक्रिय हो जाती हैं।
🔸 मुख्य प्रभाव
- भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में अधिक वर्षा होती है।
- दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तटों पर सूखा पड़ सकता है।
- उत्तरी अमेरिका में कड़ी सर्दी और अधिक हिमपात देखने को मिलता है।
🔸 भारत पर प्रभाव
- ला नीना की स्थिति में भारत में अच्छा मानसून और फसलों की अच्छी पैदावार होती है।
- लेकिन कभी-कभी अधिक वर्षा से बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है।
⚖️ एल नीनो और ला नीना में अंतर
| तुलना का आधार | एल नीनो | ला नीना |
|---|---|---|
| तापमान परिवर्तन | सामान्य से अधिक गर्म | सामान्य से अधिक ठंडा |
| वर्षा का प्रभाव | भारत में कम वर्षा | भारत में अधिक वर्षा |
| प्रशांत महासागर की स्थिति | गर्म धाराएँ बढ़ती हैं | ठंडी धाराएँ बढ़ती हैं |
| वायुमंडलीय दाब | पश्चिमी प्रशांत में दाब अधिक, पूर्व में कम | पश्चिमी प्रशांत में दाब कम, पूर्व में अधिक |
| वैश्विक प्रभाव | सूखा और गर्म मौसम | बाढ़ और ठंडा मौसम |
| तुलना का आधार | 🌡️ एल नीनो (El Niño) | ❄️ ला नीना (La Niña) |
|---|---|---|
| स्थिति | जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है | जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है |
| प्रभाव क्षेत्र | पूर्वी प्रशांत महासागर के तटीय क्षेत्र अधिक गर्म हो जाते हैं | पश्चिमी प्रशांत महासागर के तटीय क्षेत्र अधिक ठंडे हो जाते हैं |
| हवा का प्रवाह (Trade Winds) | कमज़ोर या उलटी दिशा में बहती हैं | तेज़ और सामान्य से अधिक शक्तिशाली होती हैं |
| वर्षा पर प्रभाव | भारत और ऑस्ट्रेलिया में कम वर्षा (सूखा) | भारत और ऑस्ट्रेलिया में अधिक वर्षा (बाढ़ की संभावना) |
| तापमान का असर | वैश्विक तापमान बढ़ता है (गर्म मौसम) | वैश्विक तापमान घटता है (ठंडा मौसम) |
| भारत पर प्रभाव | मानसून कमज़ोर, सूखे की स्थिति बनती है | मानसून मजबूत, अधिक वर्षा होती है |
| दक्षिण अमेरिका पर प्रभाव | तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और भारी वर्षा | तटीय क्षेत्रों में सूखा और गर्मी |
| फसलों पर असर | उत्पादन में कमी, सूखे से नुकसान | अच्छी वर्षा से फसलों की वृद्धि लेकिन बाढ़ से नुकसान भी संभव |
| ENSO चक्र में स्थिति | गर्म अवस्था (Warm Phase) | ठंडी अवस्था (Cold Phase) |
🌍 निष्कर्ष
एल नीनो और ला नीना प्राकृतिक जलवायु चक्र के महत्वपूर्ण अंग हैं, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करते हैं। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए इन दोनों की स्थिति को समझना बहुत आवश्यक है, क्योंकि इसका सीधा असर मानसून, फसलों, और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
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