
🧩 परिचय
अक्टूबर 2025 में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक दर्दनाक खबर आई, जहाँ खांसी-जुकाम के इलाज में इस्तेमाल किए गए कफ सिरप पीने के बाद कई छोटे बच्चों की मौत हो गई। जांच में सामने आया कि इन सिरपों में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) नामक जहरीला रसायन मिला हुआ था। इस घटना ने न केवल पूरे भारत को झकझोर दिया बल्कि दवा निर्माण प्रणाली की खामियों को भी उजागर कर दिया।
⚗️ क्या है डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG)?
DEG एक औद्योगिक रसायन है, जो कारों के एंटीफ्रीज़, ब्रेक फ्लुइड और पेंट में उपयोग होता है।
यह मानव शरीर के लिए अत्यंत विषैला है और इसके सेवन से गुर्दे (Kidney) और यकृत (Liver) फेल हो जाते हैं।
| तिथि | घटनाक्रम |
|---|---|
| अगस्त 2025 | छिंदवाड़ा में बच्चों को खांसी-जुकाम की दवा Coldrif दी गई। |
| सितंबर 2025 | बच्चों में गंभीर लक्षण — उल्टी, पेशाब में कमी, और गुर्दे की समस्या शुरू। |
| अक्टूबर 2025 | परीक्षण में पाया गया कि सिरप में 48% से अधिक DEG मौजूद था। |
| अक्टूबर 9, 2025 | भारत सरकार ने तीन सिरप — Coldrif, Respifresh TR, ReLife — को टॉक्सिक घोषित कर बाजार से वापस बुलाया। |
| अक्टूबर 9, 2025 | Coldrif बनाने वाली कंपनी Sresan Pharmaceuticals के मालिक को गिरफ्तार किया गया। |
⚖️ सरकारी कार्रवाई
- भारत सरकार ने दोषी कंपनियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए।
- सभी संबंधित सिरपों की बिक्री पर रोक लगाई गई।
- WHO ने भारत से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या यह सिरप विदेशों में भी निर्यात हुआ था।
- सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच और स्वतंत्र निगरानी समिति की मांग वाली याचिका दायर हुई।
💊 दोषी सिरपों की सूची
- Coldrif – Sresan Pharmaceuticals (तमिलनाडु)
- Respifresh TR – Rednex Pharmaceuticals (गुजरात)
- ReLife – Shape Pharma (गुजरात)
🚨 वैज्ञानिक रिपोर्ट
- DEG की मात्रा 0.1% की सीमा के बजाय 48.6% तक पाई गई।
- यह बच्चों की मौत का मुख्य कारण साबित हुआ।
- प्रभावित बच्चों में renal failure (गुर्दा फेल) और neurological damage के लक्षण पाए गए।
असर और प्रतिक्रियाएँ
- बच्चों की मौत से पूरे देश में भारी आक्रोश हुआ।
- संबंधित सिरपों को बाजार से वापस बुलाने (recall) का आदेश दिया गया। Reuters+2Indiatimes+2
- उन दवाई कंपनियों को उत्पादन बंद करने, लाइसेंस निलंबित करने, इत्यादि आदेश दिए गए। Reuters+2Reuters+2
- सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई जिसमें सीबीआई जांच और स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति या न्यायाधीश निगरानी की मांग की गई। Navbharat Times
- WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने भारत सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या ये सिरप विदेशों को भेजे गए थे और भारत में दवाओं की निगरानी कैसे होती है। Jagran+2NDTV India+2
- विभिन्न राज्यों में दवा नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा नमूने इकट्ठे किए जा रहे हैं।
🧠 सीख और सुधार की ज़रूरत
- दवा परीक्षण प्रणाली को सख्त बनाना होगा।
- कच्चे माल की क्वालिटी पर निगरानी बढ़ानी होगी।
- राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
- फार्मा कंपनियों पर नियमित ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए।
- बच्चों की दवाओं में अलग गुणवत्ता मानक (Child-Safe Standards) तय करने चाहिए।
📢 निष्कर्ष
“जहरीला कफ सिरप” कांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि दवा नियामक व्यवस्था की एक गंभीर चेतावनी है। अगर समय रहते गुणवत्ता नियंत्रण, लैब परीक्षण और निगरानी मजबूत न की गई, तो ऐसी त्रासदियाँ दोबारा भी हो सकती हैं।