An analysis of the Shanghai Cooperation Organisation (SCO) 2025 from an India-centric perspective

🇮🇳 भारत-केन्द्रित दृष्टिकोण से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) 2025

🔷 1. भारत और SCO की पृष्ठभूमि

भारत वर्ष 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना था। यह संगठन चीन और रूस के नेतृत्व में एशिया के सबसे बड़े बहुपक्षीय मंचों में से एक है। भारत के लिए SCO, मध्य एशिया, रूस और चीन जैसे शक्तिशाली देशों के साथ कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों को सशक्त करने का एक माध्यम है।


🔷 2. 2025 में भारत की भूमिका

2025 के टियानजिन शिखर सम्मेलन में भारत ने अपने दृष्टिकोण को “One Earth, One Family, One Future” (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) थीम के माध्यम से प्रस्तुत किया।
भारत ने इस अवसर पर तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ज़ोर दिया:

  1. आतंकवाद और सीमा-सुरक्षा:
    भारत ने जोर दिया कि SCO देशों को आतंकवाद और सीमा पार हिंसा पर “शून्य सहिष्णुता नीति” अपनानी चाहिए।
    भारत ने पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों द्वारा आतंकवाद को “राजनीतिक औजार” के रूप में प्रयोग करने की आलोचना की।
  2. आर्थिक सहयोग और संपर्क (Connectivity):
    भारत ने “चाबहार पोर्ट” और “नॉर्थ-साउथ ट्रांज़िट कॉरिडोर” जैसे प्रोजेक्ट्स को SCO देशों के लिए लाभकारी बताया।
    साथ ही, भारत ने कहा कि कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए — यह चीन के “Belt and Road Initiative (BRI)” पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी थी।
  3. सांस्कृतिक और सॉफ्ट-पावर डिप्लोमेसी:
    भारत ने योग, आयुर्वेद, मिलेट्स (Millets Year 2023 के बाद) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को साझा करने की बात रखी।
    साथ ही भारत ने SCO देशों में युवा आदान-प्रदान, शिक्षा और पर्यटन सहयोग पर बल दिया।

🔷 3. भारत के लिए अवसर

क्षेत्र अवसर आर्थिक सहयोग मध्य एशियाई देशों के साथ ऊर्जा (तेल-गैस) और व्यापार विस्तार। सुरक्षा सहयोग आतंकवाद निरोधक अभ्यास (RATS) और खुफिया साझेदारी। रणनीतिक संतुलन चीन और रूस दोनों के साथ संवाद बनाए रखकर पश्चिम-पूर्व संतुलन। सांस्कृतिक प्रभाव योग-संस्कृति और भारतीय तकनीक मॉडल से सॉफ्ट-पावर मज़बूत करना।


🔷 4. भारत के लिए चुनौतियाँ

चुनौती विवरण चीन और पाकिस्तान की उपस्थिति SCO में ये दोनों देश हैं, जिनसे भारत के संबंध तनावपूर्ण हैं। नीतिगत असमानता रूस-चीन गठबंधन के वर्चस्व में भारत की बात कई बार दब जाती है। संयुक्त बयान पर मतभेद भारत कई बार ऐसे बयान साइन नहीं करता जो उसकी संप्रभुता या आतंकवाद के दृष्टिकोण से मेल न खाते हों। आर्थिक तंत्र में भिन्नता चीन-रूस “स्थानीय मुद्रा में व्यापार” को बढ़ावा दे रहे हैं जबकि भारत डॉलर आधारित व्यापार को प्राथमिकता देता है।


🔷 5. भारत की रणनीति (Strategic Approach)

  1. “Multi-Alignment Policy”
    भारत अब Non-Alignment की जगह Multi-Alignment नीति अपनाए हुए है — यानी सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलन रखकर सहयोग।
  2. “Neighbourhood First” और “Extended Neighbourhood”
    SCO भारत के लिए मध्य एशिया तक अपना प्रभाव बढ़ाने का जरिया है, जो “एक्सटेंडेड नेबरहुड” नीति का हिस्सा है।
  3. “SCO Digital Partnership” प्रस्ताव
    भारत ने 2025 में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल साझा करने की घोषणा की — जैसे UPI, DigiLocker, और Aadhaar-आधारित सिस्टम।
  4. सांस्कृतिक एकता पर जोर
    भारत ने “SCO Cultural Year” मनाने का प्रस्ताव रखा जिसमें सभी सदस्य देशों के लोक-नृत्य, साहित्य और भोजन पर आधारित इवेंट होंगे।

🔷 6. भारत के लिए भविष्य की दिशा

  • भारत को SCO में अपनी आवाज़ मज़बूत करने के लिए रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ घनिष्ठ साझेदारी बढ़ानी होगी।
  • चीन-पाकिस्तान ब्लॉक के वर्चस्व को संतुलित करने के लिए भारत को आर्थिक और तकनीकी नेतृत्व दिखाना होगा।
  • भारत SCO Development Bank में अधिक योगदान देकर क्षेत्रीय निवेश का बड़ा भाग प्राप्त कर सकता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा और न्यू एनर्जी टेक्नोलॉजी (Hydrogen, Solar, Nuclear) क्षेत्र में भी भारत का योगदान निर्णायक हो सकता है।

🔷 7. निष्कर्ष

भारत के लिए 2025 का SCO शिखर सम्मेलन एक ऐसा मंच साबित हुआ जिसने उसे “संवाद-केन्द्र” (Dialogue Hub) के रूप में स्थापित किया।
हालांकि कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं, फिर भी भारत की “लोकतांत्रिक संतुलनकारी भूमिका” और “सस्टेनेबल डेवलपमेंट दृष्टिकोण” उसे SCO के भीतर एक विश्वसनीय, जिम्मेदार और प्रगतिशील साझेदार के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

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