What is e-waste? Causes, effects, solutions, and interesting facts.


🧠 ई-कचरा (E-Waste) क्या है?



ई-कचरा (E-Waste) से तात्पर्य उन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या उनके पुर्जों से है जो अब उपयोग के लायक नहीं रहे।
इसमें कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी, प्रिंटर, राउटर, रेफ्रिजरेटर, बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ शामिल हैं।

जब ये उपकरण खराब होकर फेंक दिए जाते हैं या बदल दिए जाते हैं, तो ये ई-कचरे के रूप में हमारे पर्यावरण के लिए एक गंभीर समस्या बन जाते हैं।



⚙️ ई-कचरा कैसे बनता है?

ई-कचरा मुख्य रूप से तब बनता है जब –

1. पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बदल दिए जाते हैं।


2. तकनीक तेजी से अपडेट होती है और नए गैजेट खरीदे जाते हैं।


3. लोग खराब उपकरणों की मरम्मत के बजाय नए खरीद लेते हैं।


4. बड़ी कंपनियाँ पुराने सर्वर, कंप्यूटर या नेटवर्क उपकरण फेंक देती हैं।



☣️ ई-कचरे का पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव

Kairastudy.in e-waste


1. मिट्टी और जल प्रदूषण:
ई-कचरे में लेड, मरकरी, कैडमियम और आर्सेनिक जैसे हानिकारक धातु होते हैं जो मिट्टी और भूजल को प्रदूषित कर देते हैं।


2. वायु प्रदूषण:
खुले में जलाने पर इससे निकलने वाली जहरीली गैसें वायुमंडल को प्रदूषित करती हैं।


3. स्वास्थ्य पर असर:

त्वचा रोग

श्वास संबंधी समस्याएं

तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर प्रभाव

कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।



🌍 भारत में ई-कचरे की स्थिति

भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा ई-कचरा उत्पादक देश है।
2023 के आँकड़ों के अनुसार, भारत में 16 लाख टन से अधिक ई-कचरा हर साल उत्पन्न होता है।

सबसे अधिक ई-कचरा दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बैंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों में बनता है।



♻️ ई-कचरा प्रबंधन (E-Waste Management)

-कचरे को सही ढंग से निपटाने के लिए भारत सरकार ने “E-Waste (Management) Rules” लागू किए हैं।
इन नियमों के तहत:

1. कंपनियों को Extended Producer Responsibility (EPR) के तहत पुराने उत्पादों को वापस लेने की जिम्मेदारी दी गई है।


2. कई शहरों में ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं।


3. रीसायकलिंग यूनिट्स में ई-कचरे को अलग-अलग धातुओं, प्लास्टिक और कांच में विभाजित करके पुनः उपयोग में लाया जाता है।


🧩 ई-कचरा प्रबंधन के उपाय

1. पुराने उपकरण दान करें – जो उपकरण काम कर सकते हैं उन्हें स्कूल, NGO या ग्रामीण क्षेत्रों में दें।


2. सर्टिफाइड रीसायकलर को दें – अनधिकृत कबाड़ी वालों को देने से पर्यावरण को नुकसान होता है।


3. नई चीज़ खरीदने से पहले सोचें – जरूरत हो तभी नया गैजेट खरीदें।


4. EPR वाले ब्रांड चुनें – जैसे Samsung, Dell, HP आदि जो पुराना प्रोडक्ट वापस लेते हैं।




📊 ई-कचरे से जुड़े रोचक फैक्ट्स (Facts about E-Waste)

1. 🌐 दुनिया हर साल 50 मिलियन टन से अधिक ई-कचरा पैदा करती है।


2. 💻 एक टन ई-कचरे से 300 ग्राम तक सोना और 100 किलो तांबा निकाला जा सकता है।


3. 🔋 केवल 17% ई-कचरा ही सही तरीके से रीसायकल होता है, बाकी खुले में जलाया या फेंका जाता है।


4. 📱 हर साल लगभग 50 करोड़ मोबाइल फोन दुनिया भर में फेंके जाते हैं।


5. 🇮🇳 भारत में ई-कचरा का केवल 5% ही रीसायकल होता है, बाकी अनौपचारिक रूप से नष्ट कर दिया जाता है।


💡 निष्कर्ष (Conclusion)

ई-कचरा केवल एक तकनीकी कचरा नहीं, बल्कि यह हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए एक गंभीर चुनौती है।
यदि हम इसे जिम्मेदारी से संभालें और रीसायकल करें, तो न केवल प्रदूषण घटेगा बल्कि मूल्यवान संसाधनों की भी बचत होगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shopping Basket
Scroll to Top