डीजल में Isobutanol मिश्रण: भारत की नई बायोफ्यूल क्रांति
“Isobutanol” (आइसोब्यूटेनॉल) एक ऑर्गैनिक अल्कोहल है, जिसका रासायनिक सूत्र C₄H₁₀O है।
नीचे उसकी खास बातें और इस खबर में क्यों चर्चा हो रही है, वो समझने की कोशिश करेंगे –
Isobutanol क्या है?
यह एक चार-कार्बन वाला अल्कोहल है, पारदर्शी तरल, जल-घुलनशीलता थोड़ी-बहुत होती है।
प्रयोग: पारंपरिक तौर पर इसका इस्तेमाल सॉल्वैंट (paint, coatings) आदि में होता है।
कुछ विशेष गुण:
इसकी फ्लैश प्वाइंट (flash point) इथेनॉल से अधिक होती है, जिससे आग लगने का खतरा कम होता है।
ऊर्जा-घनता (energy density) इथेनॉल से बेहतर हो सकती है, यानी समान मात्रा में ज्यादा ऊर्जा देने की संभावना।
खबर में क्यों है — क्या नया है?
भारत सरकार अब डीजल (diesel) में इस “आइसोब्यूटेनॉल” को मिलाने की संभावनाएँ तलाश रही है। नीचे मुख्य कारण:
1. इथेनॉल-डीजल मिश्रण (blending) काम नहीं आया
पहले इथेनॉल को डीजल में मिलाने के प्रयोग हुए, लेकिन वो तकनीकी, सुरक्षा या इंजन प्रदर्शन आदि मुद्दों की वजह से सफल नहीं हुए।
2. आइसोब्यूटेनॉल एक बेहतर विकल्प दिख रहा है
क्योंकि इथेनॉल की तुलना में इसकी कुछ सीमाएँ कम हैं — बेहतर मिश्रण (miscibility) डीजल के साथ, कम ज्वलनशीलता जोखिम, बेहतर ऊर्जा-घनता आदि।
3. पायलट प्रोजेक्ट्स व परीक्षण चल रहे हैं
भारत में ARAI (Automotive Research Association of India) जैसे संस्थाओं द्वारा 10% आइसोब्यूटेनॉल-मिक्स डीजल में उपयोग की संभावनाएँ जांची जा रही हैं।
4. पर्यावरण व नीति उद्देश्य
पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर निर्भरता कम करना
प्रदूषण (especially particulate matter, CO₂ आदि) में कमी करना
किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को बायोफ्यूल उत्पादन से लाभ पहुंचाना
आइए Isobutanol को डीजल में मिलाने पर एक तकनीकी रिपोर्ट-स्टाइल में फायदे, नुकसान और व्यवहारिक पहलु –
✅ फायदे (Advantages)
1. बेहतर मिश्रण (Compatibility)
डीजल के साथ इथेनॉल की तुलना में आइसोब्यूटेनॉल ज़्यादा आसानी से घुलता है।
फेज़ सेपरेशन (phase separation) यानी अलग परत बनना कम होता है।
2. ऊर्जा घनता (Energy Density)
इथेनॉल से ज़्यादा calorific value देता है।
इसका मतलब है इंजन पावर और माइलेज पर कम असर पड़ेगा।
3. कम ज्वलनशीलता (Safety)
फ्लैश प्वाइंट ज़्यादा है → आग लगने की संभावना कम।
स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट ज़्यादा सुरक्षित।
4. पर्यावरणीय लाभ
CO₂ और particulate matter उत्सर्जन कम कर सकता है।
नवीकरणीय स्रोत (जैसे शुगरक्रॉप, बायोमास) से उत्पादन संभव।
5. किसानों को फायदा
इथेनॉल की तरह आइसोब्यूटेनॉल भी कृषि आधारित फीडस्टॉक से बन सकता है → गन्ना, मक्का आदि फसलों की मांग बढ़ेगी।
❌ नुकसान / चुनौतियाँ (Disadvantages / Challenges)
1. उत्पादन लागत (Production Cost)
अभी आइसोब्यूटेनॉल का उत्पादन इथेनॉल की तुलना में महंगा है।
बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित करने की ज़रूरत।
2. इंजन परीक्षण (Engine Compatibility)
हालांकि 10% ब्लेंड (B10) पर पायलट सफल दिखा है, लेकिन
पुराने डीजल इंजन में कुछ बदलाव की ज़रूरत पड़ सकती है।
Fuel injectors और combustion ट्यूनिंग पर असर।
3. सप्लाई चेन
पूरे भारत में पेट्रोल पंप स्तर पर आइसोब्यूटेनॉल उपलब्ध कराना अभी चुनौती है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर (storage tanks, blending units) नया लगाना पड़ेगा।
4. नियम और मानक (Regulations & Standards)
भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक के अनुसार ब्लेंडिंग का प्रमाणन जरूरी है।
अभी तक इथेनॉल के लिए नीतियां बनी हैं, आइसोब्यूटेनॉल के लिए नए दिशा-निर्देश बनाने होंगे।
📊 तुलना (Ethanol vs Isobutanol)
गुणधर्म (Property) इथेनॉल (Ethanol) आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol)
ऊर्जा घनता (MJ/L) ~21 ~29 (डीजल ~35)
फ्लैश प्वाइंट कम (ज्यादा रिस्क) ज्यादा (सुरक्षित)
पानी में घुलनशीलता बहुत ज़्यादा कम → डीजल के साथ बेहतर
इंजन संगतता सीमित (डीजल में कठिन) ज़्यादा बेहतर विकल्प
🚀 भारत में स्थिति
2025 में पायलट प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं → 10% isobutanol blending in diesel।
नितिन गडकरी ने कहा है कि अगर प्रयोग सफल रहा तो इसे इथेनॉल की तरह राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा।
इससे भारत को “flex-fuel economy” की दिशा में और मजबूती मिलेगी।